पाठ्यक्रम: GS2/शासन; सामाजिक मुद्दे
संदर्भ
- हाल ही में, केंद्रीय श्रम मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने अपने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र का विस्तार करने में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा कल्याणकारी कार्यक्रमों से लाभान्वित हो सके।
भारत में सामाजिक सुरक्षा का अवलोकन
- भारत में सामाजिक सुरक्षा आर्थिक और सामाजिक नीति का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है जिसका उद्देश्य देश की विविध जनसंख्या को वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।
- यह मुख्य रूप से सरकारी पहलों, नियोक्ता-आधारित लाभों और सामाजिक बीमा कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
- सामाजिक सुरक्षा को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे में शामिल हैं:
- कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952;
- कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948;
- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961;
- असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008;
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020।
- ये कानून और नीतियाँ संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कवर करती हैं, उन्हें वित्तीय सुरक्षा और कल्याण लाभ प्रदान करती हैं।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और सतत विकास
- सामाजिक संरक्षण एक मान्यता प्राप्त मानव अधिकार है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
- सतत विकास लक्ष्यों के लक्ष्य 1 का उद्देश्य राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के माध्यम से 2030 तक गरीबी को समाप्त करना है, तथा कमजोर समूहों को कवरेज सुनिश्चित करना है।
- मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 22 में सामाजिक सुरक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में महत्त्व दिया गया है, जिसकी पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा सामाजिक सुरक्षा संबंधी अनुशंसा में की गई है।
भारत में प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ
- पेंशन और भविष्य निधि योजनाएँ:
- कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत EPFO द्वारा प्रबंधित, EPF 20 या अधिक श्रमिकों वाले संगठनों में कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य बचत योजना है।
- नियोक्ता और कर्मचारी दोनों इस कोष में कर्मचारी के वेतन का 12% योगदान करते हैं।
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा विनियमित एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना।
- यह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है।
- आयकर अधिनियम की धारा 80 सी.सी.डी. के अंतर्गत कर लाभ प्रदान करता है।
- कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत EPFO द्वारा प्रबंधित, EPF 20 या अधिक श्रमिकों वाले संगठनों में कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य बचत योजना है।
- असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा:
- प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM): असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक पेंशन योजना, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है।
- इसमें एक छोटा सा मासिक अंशदान (₹55-₹200) देना होता है, तथा सरकार भी उतना ही अंशदान देती है।
- प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY): 18-40 वर्ष की आयु के छोटे और सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना।
- भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण योजना (BOCW): निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बीमा लाभ प्रदान करती है।
- अटल पेंशन योजना (APY): कम आय वाले श्रमिकों के लिए एक गारंटीकृत पेंशन योजना, जो वृद्धावस्था में वित्तीय सुरक्षा को प्रोत्साहित करती है।
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ( PMJJBY): 18-50 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के लिए ₹436 के वार्षिक प्रीमियम पर ₹2 लाख का जीवन बीमा कवरेज।
- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): यह एक दुर्घटना बीमा योजना है, जिसमें आकस्मिक मृत्यु और दिव्
- गता के लिए 2 लाख रुपये का कवर दिया जाता है।
- प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM): असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक पेंशन योजना, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है।
- स्वास्थ्य और बीमा योजनाएँ:
- कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI): प्रति माह 21,000 रुपये तक कमाने वाले कर्मचारियों को चिकित्सा और दिव्यांगता लाभ प्रदान करती है।
- बीमारी, मातृत्व, दिव्यांगता और रोजगार के दौरान चोट लगने के कारण मृत्यु से संबंधित व्ययों को कवर करता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY): BPL (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों के लिए सरकार द्वारा वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना।
- आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY): आर्थिक रूप से वंचित समूहों के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का मुफ्त चिकित्सा कवरेज प्रदान करने वाली विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना।
- कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI): प्रति माह 21,000 रुपये तक कमाने वाले कर्मचारियों को चिकित्सा और दिव्यांगता लाभ प्रदान करती है।
- मातृत्व एवं दिव्यांगता लाभ:
- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961: 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में कार्यरत महिलाओं को 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान करता है।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना (IGNDPS): गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले विकलांग व्यक्तियों को प्रति माह 300-500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- रोजगार और श्रम कल्याण:
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ( MGNREGA): ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी देता है, जिससे आय सुरक्षा मजबूत होती है।
- ई-श्रम पोर्टल: असंगठित श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस, जो सामाजिक सुरक्षा लाभों के लक्षित वितरण को सक्षम बनाता है।
सामाजिक सुरक्षा में हालिया विस्तार
- गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को लाभ प्रदान करना: गिग अर्थव्यवस्था के उदय के साथ, सरकार ने ई-श्रम और सामाजिक सुरक्षा संहिता जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से गिग श्रमिकों (जैसे खाद्य वितरण एजेंट और कैब ड्राइवर) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रस्ताव दिया है।
- डिजिटल और वित्तीय समावेशन: जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति ने कल्याणकारी लाभों के वितरण को मजबूत किया है, लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) सुनिश्चित किया है, लीकेज को कम किया है और पारदर्शिता में सुधार किया है।
- ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (ONORC) के अंतर्गत राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी: यह प्रवासी श्रमिकों को भारत में कहीं भी सब्सिडी वाले खाद्यान्न तक पहुंच प्रदान करने में सक्षम बनाता है।
- अनौपचारिक श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य देखभाल और बीमा को मजबूत करना: सरकार अनौपचारिक श्रमिकों को स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करने, PM-JAY और ESIC सुविधाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दे रही है।
सामाजिक सुरक्षा नेट के विस्तार में चुनौतियाँ
- कवरेज का कम आंकलन: ILO रिपोर्ट में खाद्य सुरक्षा और आवास या राज्य द्वारा प्रशासित योजनाओं जैसे वस्तुगत लाभों को शामिल नहीं किया गया है।
- इन कारकों को शामिल करने के बाद वास्तविक कवरेज अधिक होने की संभावना है।
- असंगठित क्षेत्र में कम कवरेज: भारत का 90% से अधिक कार्यबल असंगठित क्षेत्र में है, फिर भी केवल एक छोटा सा हिस्सा ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित होता है।
- जागरूकता और पहुंच का अभाव: कई पात्र लाभार्थी मौजूदा योजनाओं से अनभिज्ञ रहते हैं, जिसके कारण नामांकन दर कम हो जाती है।
- वित्तपोषण और कार्यान्वयन संबंधी बाधाएँ: सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए बड़ी वित्तीय आवश्यकता के कारण बजटीय बाधाएँ उत्पन्न होती हैं, जबकि अंतिम लक्ष्य तक कार्यान्वयन एक चुनौती बनी हुई है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।
- खंडित कवरेज: अनेक योजनाओं के बावजूद, अनेक श्रमिक – विशेषकर असंगठित क्षेत्र में – औपचारिक सुरक्षा नेट से बाहर रहते हैं।
- नौकरशाही बाधाएँ और भ्रष्टाचार: दावों के निपटान में देरी और धन आवंटन में अनियमितताएँ इन कार्यक्रमों की दक्षता को कम करती हैं।
आगे की राह
- योजनाओं का एकीकरण: एकीकृत सामाजिक सुरक्षा ढांचा दक्षता और पहुंच को बढ़ा सकता है।
- प्रौद्योगिकी-संचालित वितरण: डिजिटल नामांकन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और मोबाइल एप्लिकेशन का विस्तार करके पहुंच में सुधार किया जा सकता है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना: पेंशन और बीमा समाधान प्रदान करने में निजी क्षेत्र को शामिल करने से सामाजिक सुरक्षा कवरेज को बढ़ाया जा सकता है।
- असंगठित क्षेत्र को औपचारिक बनाना: सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में श्रमिकों को पंजीकृत करने के लिए नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करना।
- प्रक्रियाओं का सरलीकरण: कागजी कार्रवाई को कम करना और नामांकन प्रक्रियाओं को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना।
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संक्षिप्त समाचार 25-03-2025